Digital Currency से खतरा RBI क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने के पक्ष में, कानूनी विशेषज्ञों ने कहा

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी 8 साल पुरानी राय पर वापस आ रहा है। यह क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इसे जल्दी कर देना चाहिए, क्योंकि इसमें पहले ही बहुत देरी हो चुकी है।

2013 में खतरे की आशंका जताई गई थी

दरअसल RBI ने साल 2013 में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर एक नोट जारी किया था। इस नोट में इसने कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी भारतीयों के फाइनेंशियल, लीगल और सिक्योरिटी के लिए जोखिम है। इसके चार साल बाद 2017 में दुनिया की पहली क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन को लॉन्च किया गया। अब 8 साल बाद रिजर्व बैंक इस पर बैन लगाने के पक्ष में है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी 8 साल पुरानी राय पर वापस आ रहा है। यह क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इसे जल्दी कर देना चाहिए, क्योंकि इसमें पहले ही बहुत देरी हो चुकी है।

IMF भी चिंता जाहिर कर चुका है

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ भी इसी तरह की चिंता जाहिर कर चुकी हैं। उनके मुताबिक, उभरते और विकसित देशों के सामने बड़ी चुनौतियां इससे पैदा हो जाएंगी। कानूनी जानकार कहते हैं कि क्रिप्टो को न तो करेंसी और न ही असेट के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

सरकार अभी भी तय नहीं कर पाई

सरकार अभी भी इस मामले में कुछ तय नहीं कर पाई है। हालांकि संसद के शीतकालीन सत्र में इस पर बिल जरूर आना था, पर वह भी अगले सत्र के लिए टल गया। फिनटेक कंपनियों के मुताबिक, सरकार का एक सेक्शन क्रिप्टो पर बैन लगाने के पक्ष में पूरी तरह से है। कानूनी सलाहकार कहते हैं कि क्रिप्टो को कानूनी मुद्रा मानने का कोई सवाल ही नहीं है। क्रिप्टो पर बैन लगाना चाहिए। हालांकि इसमें पहले ही बहुत देरी हो चुकी है।

निवेश के साधन के तौर पर सरकार चाहती है

सरकार क्रिप्टो को एक निवेश के साधन के तौर पर लाना चाहती है और इसे कायदे से रेगुलेट करना चाहती है। कुछ लोग इस पक्ष में हैं कि इनकम टैक्स नियम के तहत क्रिप्टोकरेंसी को असेट के तौर पर लाकर इस पर कैपिटल गेन टैक्स लगाना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि नियम ऐसा हो कि कोई भी बिना मंजूरी के इससे कमाई गई रकम को बाहर न ले जा सके। हालांकि दूसरी दिक्कत यह है कि भारत फॉरेन एक्सचेंज रेगुलेटेड मार्केट है और इसलिए विकसित देशों की तरह कुछ फैसले नहीं भी लिए जा सकते हैं।


दरअसल RBI ने साल 2013 में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर एक नोट जारी किया था। इस नोट में इसने कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी भारतीयों के फाइनेंशियल, लीगल और सिक्योरिटी के लिए जोखिम है। इसके चार साल बाद 2017 में दुनिया की पहली क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन को लॉन्च किया गया। अब 8 साल बाद रिजर्व बैंक इस पर बैन लगाने के पक्ष में है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी 8 साल पुरानी राय पर वापस आ रहा है। यह क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इसे जल्दी कर देना चाहिए, क्योंकि इसमें पहले ही बहुत देरी हो चुकी है।

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