सुप्रीम कोर्ट से राज्य और केंद्र सरकार की मांग चार महीनों तक स्थगित हो चुनाव

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भोपालः मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, पंचायत चुनाव से संबंधित अध्यादेश वापस लेकर सरकार ने एक तरह से पंचायत चुनाव पर रोक लगा दी है, लेकिन निर्वाचन आयोग ने इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. इस बीच राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी मांग की है, जिसकी जानकारी शिवराज सरकार में शामिल मंत्री भूपेंद्र सिंह ने दी है. 


मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण के मामले को लेकर राज्य और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. दोनों सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव 4 महीने के लिए स्थगित किये जाने चाहिए. 


मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा पंचायत चुनाव में ओबीसी वर्ग को आरक्षण मिले इसके लिए सरकार लगातार काम कर रही है, सरकार के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पंचायत चुनाव को लेकर पुनर्विचार याचिका भी लगाई गई है.

ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत चुनाव हो इसलिए सुप्रीम कोर्ट से 4 महीने का समय मांगा गया है. राज्य सरकार की तरफ से दायर की गई याचिका में 4 महीने का वक्त मांगा गया है. समय मिलने से पिछड़ा वर्ग आयोग ओबीसी की आर्थिक और सामाजिक स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर लेगी. इसलिए 4 महीने का वक्त कोर्ट से मांगा गया है. ताकि पंचायत चुनाव पूरी तरह से ओबीसी आरक्षण के साथ हो. 


मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया राज्य सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वकील हरीश साल्वे पक्ष रखेंगे, इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से भी याचिका लगाई गई है, जिसमे वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता पक्ष रखेंगे. जबकि एक एक याचिका ओबीसी वर्ग की तरफ से भी लगाई गई है.

कुल तीन याचिका पुनर्विचार के लिए लगाई गई है. इसलिए जल्द सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पुनर्विचार की मांग की गई है. सरकार ओबीसी आरक्षण में निष्पक्षता चाहती है, असमंजस की स्थिति समाप्त हो इसलिए सुप्रीम कोर्ट गए हैं, इसलिए जल्द जल्द सुनवाई की मांग की गई है. 


मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर अभी भी पेंच फंसा हुआ है. क्योंकि पंचायत चुनाव पर रोक लगाने के प्रस्ताव पर सरकार और राज्यपाल की तरफ से मुहर लग चुकी है. ऐसे में गेंद अब निर्वाचन आयोग के पाले में हैं.

निर्वाचन आयोग की इसी मुद्दे पर अहम बैठक भी हुई है, हालांकि अब तक चुनाव रद्द करने या नहीं करने का निर्वाचन आयोग की तरफ से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही इस मुद्दे पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है. 

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