सिंगरौली महापौर: 22 वर्षो के संघर्ष और निष्ठा का अरविंद को मिल सकता है प्रतिफल, युवाओं ने टिकट देने की उठाई मांग

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लोगो मे उम्मीद: बदलेगी सिंगरौली की तस्वीर,मामा का सपना होगा साकार

अनोखी आवाज सिंगरौली श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि नवजीवन बिहार में जन्मे अरविन्द दुबे के 22 वर्षो के एक लंबे संघर्ष और निष्ठा का अब लगता है प्रतिफल मिलने का समय आ गया है। सर्वहारा वर्ग के नेता ,हर किसी से सुख दुख में खड़े रहने वाले अरविन्द दुबे को अब युवा वर्ग भी महापौर का टिकट दिलाने को लेकर लामबंद हो गया है। सोशल मीडिया ही नहीं लोगों के मन मस्तिष्क पर इन दिनों यदि किसी का नाम है तो वो अरबिंद है।

22 वर्षों का राजनीतिक सफर


सभी वर्ग के लोगों में अच्छी पैठ रखने वाले श्री दुबे का राजनीतिक सफर साफ सुथरा रहा है। यू तो 1986-87 में आएएसएस से जुडकर बाल स्वंयसेवक के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। लेकिन भारतीय जनता पार्टी वर्ष 2000 से सक्रिय हुए और वर्तमान में निरंतर पार्टी द्वारा दी जा रही जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहें है। इस दरम्यान 2003 से 2005 तक महामंत्री भाजयुमों शक्ति केन्द्र नवजीवन बिहार रहें, वर्ष 2005 से 2007 तक मण्डल अध्यक्ष भाजयुमों सिंगरौली,2007 से 2010 तक जिला महामंत्री भाजयुमों सिंगरौली,2010 से 2012 मण्डल अध्यक्ष भाजपा मण्डल सिंगरौली, 2012 से 2015 तक जिला मंत्री भाजपा, 2016 से जून 2021 तक जिला उपाध्यक्ष वहीं वर्तमान में प्रभारी मण्डल बरगवां के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहें है। यदि इनके राजनीतिक अनुभव की बात करें तो वर्ष 2007 से निरंतर विधानसभा,लोकसभा सहित नगरीय निकाय के चुनाव में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर पार्टी को विजय बनवाने में पूरा दमखम लगाते रहें है।

बदलेगी सिंगरौली की तस्वीर,मामा का सपना होगा साकार


जन सरोकार के मुद्दो पर मुखर रहने वाले और सामाजिक समरसता के लिए बढ चढकर कर हिस्सा लेने वाले अरविन्द दुबे को यदि भाजपा महापौर के रूप में मैदान में उतारती है तो निश्चित ही सभी वर्ग के लोगों का भरपूर समर्थन मिलेगा। वहीं इनसे जुडे लोगों व युवाओं का मानना है कि सिंगरौली की जो वर्तमान में तस्वीर है वह कोई स्थानिय ही बदल सकता है। ऐसे में अरविन्द दुबे से बेहतर विकल्प कोई और हो नहीं सकता। इतना ही शिवराज मामा का सिंगरौली को सिंगापुर बनाने का सपना भी पूरा होगां।वहीं आम जनमानस में चर्चा है कि यदि पार्टी समय रहते सही प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारती तो कई चुनौतियों का सामना करना पडेगा।

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