Tuesday, February 7, 2023
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Raksha Bandhan 2022 : रक्षाबंधन 12 को, पंचक योग में मनेगा राखी का त्योहा, भद्रा की नहीं पड़ेगी साया

ज्योतिष के जानकार पंडित मोहन कुमार दत्त मिश्र कहते हैं कि इसबार दो दिन पूर्णिमा का मान रहने से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है।

Raksha Bandhan 2022: On the day of Raksha Bandhan tie Rakshasutra in  Ayushman Yoga know best time to tie Rakhi - Astrology in Hindi - Raksha  Bandhan 2022: रक्षा बंधन के दिन
Raksha Bandhan

ज्योतिष के जानकार पंडित मोहन कुमार दत्त मिश्र कहते हैं कि इसबार दो दिन पूर्णिमा का मान रहने से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। परंतु, भद्रा का त्याग करके ही।

निर्णय सिंधु के अनुसार हवाले से वे बताते हैं कि पूर्णिमा को दो भागों में बांटा गया है। पहला व्रताय पूर्णिया और दूसरा स्नान दान पूर्णिमा। अगर सूर्योदय चतुर्दशी तिथि में हुआ हो। सूर्योदय के बाद पूर्णिमा का मान आरंभ हुआ हो और पूर्णिमा पूरे दिन एवं रात्रि तक रहता है तो वह व्रताय पूर्णिमा कहलाती है।

श्रीहनुमान पंचांग, हृषिकेष पंचांग, महावीर पंचांग और अन्नपूर्णा पंचांग के अनुसार 11 अगस्त को सूर्योदय प्रात: 5 बजकर 30 मिनट में हो रहा है। इस दिन पूर्णिमा का मान दिन में 9 बजकर 35 मिनट पर है। परंतु, उसी समय यानि 9.35 दिन में पूर्णिमा के साथ भद्रा का भी प्रारंभ हो रहा है। भद्रा का साया रात्रि 8.25 तक है। व्रत पर्वोत्सव के अनुसार भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी पूर्णिमा वर्जित माना गया है।

12 अगस्त को प्रात: सूर्योदय 5 बजकर 31 मिनट पर होगा और पूर्णिमा का मान प्रात: 7 बजकर 17 मिनट तक है। धर्म सिंधु के अनुसार जिस तिथि में सूर्योदय होता है, वही अस्त कहलाता है। अत: पूर्णिमा उदयव्यापिनी 12 अगस्त को मनाना श्रेष्ठकर माना गया है। शास्त्रों के अनसुार भद्रा में भुलकर भी रक्षा सूत्र नहीं बांधना चाहिए। भद्रा शनि की बहन हैं।

अनिष्ट निवारण है रक्षाबंधन :-

सोहसराय हनुमान मंदिर के पुजारी पं. सुरेन्द्र दत्त मिश्र बताते हैं कि रक्षाबंधन की परंपरा प्राचीनकाल से चली आ है। धार्मिक और पौराणिक मतानुसार रक्षाबंधन श्रावण शुल्क पक्ष पूर्णिमा को मनाया जाता है। रक्षाबंधन एक सुरक्षा कवच है। अनिष्ट निवारण सूत्र है। रक्षा यानी सुरक्षा और बंधन का अर्थ बांधना है। प्राचीनकाल में अपने हितैषीजनों को रक्षासूत्र बांधकर सदा आपदा व संकटों से बचने के उद्देश्य से ऋषि-महर्षि, पुरोहित व ब्राह्मण अपने यजमान के दाहिने हाथ की कलाई में अभिमंत्रित सूत्र बांधकर रक्षा और विजयी की कामना करते थे।

रक्षा बांधने का शुभ समय :

  • प्रात:काल मुहूर्त 5.31 से 7.17 तक
  • अभिजित मुहूर्त 11.24 से 12.36 तक
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