बिजली कटौती सरकार का बड़ा ऐलान!  कोल सप्लाई बढ़ाने के लिए 657 ट्रेन ट्रिप रद्द

बिजली

खबर अच्छी लगी हो तो निचे दिए गये बटन को दबाकर शेयर करें

सरकार ने कहा है कि देश में बिजली की डिमांड ‘ऑल टाइम हाई’ है।

16 rajyo me 10 ghante bijali kattoti: देशभर में बिजली की मांग बढ़ती जा रही है। ऐसे में देश के एक चौथाई पावर प्लांट बंद हैं। नतीजा, 16 राज्यों में 10 घंटे तक के बिजली कटौती शुरू हो गई है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, देशभर में 10 हजार मेगावॉट, यानी 15 करोड़ यूनिट की कटौती हो रही है, लेकिन बिजली की कमी वास्तव में कहीं ज्यादा है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में बिजली की डिमांड ‘ऑल टाइम हाई’ है। शुक्रवार को बिजली की मांग दोपहर दो बजकर 50 मिनट पर 2 लाख 7 हजार 111 मेगावाट को छू गई। यह अब तक का सबसे उच्च स्तर है।

बिजली

इस बीच रेल मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने पावर प्लांट्स तक कोयले की तेजी से सप्लाई के लिए कुल 657 ट्रेन ट्रिप अनिश्चित काल के लिए रद्द कर दिया है, ताकि कोयला ले जा रही मालगाड़ियां समय पर निर्धारित स्टेशनों पर पहुंच सकें।

कोयला मंत्री बोले-घबराएं नहीं, स्टॉक की भरपाई जारी
केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ताप विद्युत संयंत्रों के पास 21.5 मिलियन टन कोयले का भंडार है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। मैं विश्वास दिलाता हूं। देश भर में हमारे पास जो भी 7-10 दिन का स्टॉक बचा है, उसकी रोजाना भरपाई की जा रही है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स भी बना रहा रेलवे
भारतीय रेलवे के कार्यकारी निदेशक गौरव कृष्ण बंसल के मुताबिक पैसेंजर ट्रेनों को रद्द करने का फैसला अस्थायी है। स्थिति सामान्य होते ही सेवाएं वापस शुरू कर दी जाएंगी। इस फैसले के बाद रेलवे अपने बेड़े में एक लाख और वैगन जोड़ने जा रहा है। इसके अलावा रेलवे माल को तेजी से पहुंचाने के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स भी बना रहा है।

5 साल में पहली बार बढ़ाई एवरेज डेली लोडिंग
अस्थायी रूप से रद्द की गई लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के 657 फेरे शामिल हैं। इसके साथ ही रेलवे ने कोल रैक्स की एवरेज डेली लोडिंग भी 400 से ज्यादा कर दी है। यह आंकड़ा पिछले 5 साल में सबसे ज्यादा है। रेलवे प्रति दिन 415 कोल रैक्स की ढुलाई कर रहा है, ताकि कोयले की मौजूदा मांग को पूरा किया जा सके। इनमें से हर एक कोल रैक में 3500 टन कोयला होता है।

बिजली

राजधानी में भी परेशानी
वहीं, बिजली कटौती का असर अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी होने लगा है। कोयले की कमी के गहराते संकट के बीच दिल्ली सरकार ने मेट्रो और अस्पतालों समेत कई आवश्यक संस्थानों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति में असमर्थता जताई है। दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने स्थिति का आकलन करने के लिए गुरुवार को एक आपातकालीन बैठक की। साथ ही केंद्र को पत्र लिखा और अनुरोध किया कि वह राष्ट्रीय राजधानी को बिजली की आपूर्ति करने वाले बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

जैन ने बताया कि राजधानी के प्लांट्स में एक दिन का ही स्टॉक बचा हुआ है। दादरी-2 और ऊंचाहार बिजली स्टेशनों से बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है। वर्तमान में दिल्ली में बिजली की 25-30% मांग इन बिजली स्टेशनों से ही पूरी की जा रही है। इन स्टेशनों में पिछले कुछ दिनों से कोयले की कमी है। ऐसे में समस्या कभी भी गहरा सकती है।

सत्येंद्र जैन के दावे पर NTPC की सफाई
NTPC ने कहा दादरी की सभी 6 और ऊंचाहार की 5 यूनिट्स पूरी क्षमता से चल रही हैं और वहां नियमित कोयला आपूर्ति हो रही है। मौजूदा स्टॉक क्रमशः 140000 मीट्रिक टन और 95,000 मीट्रिक टन है और आयात कोयले की आपूर्ति भी पाइपलाइन में है।

उधर, अकेले UP में ही 3 हजार मेगावॉट से ज्यादा की कमी है। वहां 23 हजार मेगावॉट बिजली की डिमांड है, जबकि सप्लाई 20 हजार मेगावाॅट है। बिजली कटौती का मुख्य कारण देश के एक चौथाई बिजली प्लांट्स का बंद होना है। इनमें से 50% प्लांट कोयले की कमी के चलते बंद हैं।

पावर सेक्टर के विशेषज्ञ शैलेंद्र दुबे ने भास्कर को बताया कि देश में बिजली उत्पादन की मौजूदा क्षमता 3.99 लाख मेगावाॅट है। इसमें 1.10 लाख मेगावाॅट रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर-विंड) की हिस्सेदारी है। बाकी बचे 2.89 लाख मेगावाॅट में से 72,074 मेगावाॅट क्षमता के प्लांट बंद हैं। इनमें से 38,826 मेगावाॅट क्षमता के प्लांट्स में उत्पादन हो सकता है, लेकिन ईंधन उपलब्ध नहीं है। 9,745 मेगावाॅट क्षमता के प्लांट्स में शेड्यूल्ड शटडाउन है। 23,503 मेगावाॅट क्षमता के प्लांट अन्य कारणों से बंद पड़े हैं।

पावर प्लांट के पास क्षमता से सिर्फ 25% कोयला, यही प्रमुख वजह
ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक देश के 18 पिटहेट प्लांट यानी ऐसे बिजलीघर, जो कोयला खदानों के मुहाने पर ही हैं, उनमें तय मानक का 78% कोयला है। जबकि दूर दराज के 147 बिजलीघर (नॉन-पिटहेट प्लांट) में मानक का औसतन 25% कोयला उपलब्ध है। यदि इन बिजलीघरों के पास कोयला स्टॉक तय मानक के मुताबिक 100% होता तो पिटहेट प्लांट 17 दिन और नॉन-पिटहेट प्लांट्स 26 दिन चल सकते हैं।

देश के कुल 173 पावर प्लांट्स में से 106 प्लांट्स में कोयला शून्य से लेकर 25% के बीच ही है। दरअसल कोयला प्लांट बिजली उत्पादन को कोयले के स्टॉक के मुताबिक शेड्यूल करते हैं। स्टॉक पूरा हो तो उत्पादन भी पूरा होता है। रेलवे ने कहा है एक हफ्ते में ही कोल सप्लाई में 10% की वृद्धि हुई है। मालगाड़ी के खदान से प्लांट तक पहुंचने का समय 12% से 36% घटा है।

पूरी क्षमता से चलें प्लांट्स: जोशी
केंद्रीय कोयला और खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि देशभर के थर्मल प्लांट्स के पास 2.20 करोड़ टन कोयला है, जो 10 दिन के लिए काफी है। ऐसे में उन्हें पूरी क्षमता के साथ उत्पादन करना चाहिए। CCL के प्रबंध निदेशक पीएम प्रसाद ने बताया कि प्लांट्स को रोज 2.2 लाख टन कोयला दिया जाएगा।

पंजाब में भी बिजली संकट बढ़ा
पंजाब में बिजली संकट बढ़ गया है। करीब 46 डिग्री टैंप्रेचर के बावजूद 12 घंटे तक कट लग रहे हैं। शहरों में 4 से 5, तो गांवों में 10 से 12 घंटे के कट झेलने पड़ रहे हैं। इसको लेकर अब AAP सरकार के बिजली मंत्री हरभजन सिंह ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि पिछली चन्नी सरकार इस सीजन के लिए कोई प्रबंध करके नहीं गई। पिछले साल के मुकाबले बिजली की मांग 40% बढ़ी है। ऐसे में 24 घंटे बिजली के लिए कोशिश की जा रही है। 

 Omni से लेकर Alto तक जानिए भारत और पाकिस्तान में बिकने वाली कारों की कीमत में अंतर

खबर अच्छी लगी हो तो निचे दिए गये बटन को दबाकर शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published.

बहुचर्चित खबरें