आज से पेसा एक्ट लागू हुआ,शिवराज का ‘ट्राइबल स्ट्रोक- MP NEWS

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भोपाल. मध्यप्रदेश में 4 दिसंबर से पेसा एक्ट लागू (PESA Act) हो गया है। इसे लागू करने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने टंट्या मामा (Tantya Mama) के बलिदान दिवस का अवसर चुना। इसके साथ ही चौहान (CM Shivraj) ने ऐलान किया कि आदिवासियों (Tribal Politics) पर दायर मामूली आपराधिक केस वापस लिए जाएंगे। समझिए क्या है ये पेसा एक्ट और क्यों लागू किया?जल, जंगल और जमीन के अधिकार मिलेंगे

पेसा एक्ट यानी पंचायत का अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार किया जाना। इस एक्ट को 1996 में लागू किया गया था। पेसा एक्ट कहता है कि स्थानीय संसाधनों पर अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) लोगों की समिति को अधिकार दिए जाने चाहिए। इससे ग्राम पंचायतों को जमीन, खनिज संपदा, लघु वनोपज की सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार मिलता है। फिलहाल की स्थिति में देश के दस राज्यों में ये कानून लागू है लेकिन छत्तीसगढ़, झारखंड, एमपी और ओडिशा में ये पूरी तरह से लागू नहीं है। अब ये कानून मध्यप्रदेश में भी पूरी तरह लागू होगा। हालांकि, प्रदेश में पेसा एक्ट कैसे लागू किया जाएगा, सरकार ने अभी तक इसका कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है।विशेषताएं एवं अधिनियम के प्रावधान

  • इस अधिनियम की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें जनजातीय समाजों की ग्राम सभाओं को अधिक शक्तियां दी गई है। 
  • इस कानून के तहत ग्राम सभा को कई अधिकार मिलेंगे। जैसे आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति रिवाज, सांस्कृतिक पहचान, समुदाय के संसाधन और विवाद समाधान के लिए अपने परंपरागत तरीकों का इस्तेमाल कर सकेंगे। 
  • भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास के काम में जनजातीय ग्राम सभा को सलाह देने का अधिकार मिला है। साथ ही खदानों और खनिजों के लाइसेंस/पट्टा देने के लिए ग्राम सभा को सिफारिशें देने का भी अधिकार दिया गया है।
  • प्रत्येक गांव में एक ग्राम सभा होगी। जिसमें वे सभी व्यक्ति शामिल होंगे जिनका नाम ग्राम स्तर पर पंचायत के लिए तैयार की गई मतदाता सूची में शामिल है।
  • हर ग्राम सभा सामाजिक और आर्थिक विकास की परियोजनाओं और कार्यक्रमों को स्वीकृति देगी। 
  • इस अधिनियम द्वारा संविधान के भाग 9 के पंचायतों से जुड़े प्रावधानों को जरूरी संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तारित करने का टारगेट है।
  • अनुसूचित क्षेत्रों में प्रत्येक पंचायत को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाएगा। साथ ही यह शर्त भी है कि अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण कुल स्थानों के 50% से कम नहीं होगा। 
  • अनुसूचित क्षेत्रों में लघु जल निकायों की योजना बनाने तथा उसका प्रबंधन करने का काम उपयुक्त स्तर की पंचायतों को सौंपा जाएगा।
  • अनुसूचित क्षेत्रों में गौण खनिजों के लिये लाइसेंस या खनन पट्टा देने के लिये ग्राम सभा पंचायत के उचित स्तर की सिफारिशों को अनिवार्य बनाया जाएगा।
  • अनुसूचित क्षेत्रों में खनिजों के लिए खनन की बोली करने से पहले ग्राम सभा की पहले से ही सिफारिश लेना अनिवार्य होगा।
  • गांवों के बाज़ारों के प्रबंधन की शक्ति, चाहे वे किसी भी नाम से प्रयोग में हो।
  • अनुसूचित जनजातियों को धन उधार दिए जाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने की शक्ति।
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