पंचायत चुनाव: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका, सरकार से 4 सप्ताह में जवाब मांगा

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ग्वालियर. मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) पंचायत चुनाव (Panchayat elections) दो साल से टल रहे हैं। प्रदेश सरकार ने पंचायत अधिनियम में संशोधन (Amendment in Panchayat Act) किया है। 21 नवंबर को मध्य प्रदेश पंचायत राज और ग्राम स्वराज्य संशोधन अध्यादेश पारित (Ordinance passed) किया गया था। लेकिन इस संशोधन के खिलाफ हाईकोर्ट (High Court) में चुनौती दी गई है। क्योंकि अध्यादेश द्वारा पंचायत एक्ट (Panchayat Act) में सेक्शन 9 अ को जोड़ा गया है। जिसे नियम विरुद्ध बताकर याचिका लगाई गई है। दायर याचिका में कहा गया है कि संशोधन संविधान की धारा 243 से कवर्ड नहीं है।कांग्रेस जा सकती है कोर्ट

उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा पुराने परिसीमन के आधार पर ही पंचायत चुनाव कराने के फैसले पर कांग्रेस ने भी नाराजगी जाहिर की थी और सरकार के इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही थी। कांग्रेस का आरोप था कि सरकार चुनाव में देरी कराना चाहती है, इसलिए उसने यह फैसला किया है। हालांकि हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी शर्मा ने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए पंचायत चुनाव टालने की मांग कर डाली थी। जिस पर BJP ने कांग्रेस पर चुनाव टालने की कोशिश का आरोप लगा दिया था। फिलहाल दोनों ही पार्टियां, BJP और कांग्रेस एक दूसरे पर चुनाव को टालने का आरोप लगा रही हैं। रोटेशन प्रणाली लागू करने की मांग

यह याचिका मध्यप्रदेश के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजीव शर्मा ने लगाई है। यह मामला ग्वालियर (Gwalior) हाईकोर्ट की बेंच में है। कल्लू राम सोनी नाम के व्यक्ति ने अध्यादेश को चुनौती दी है। साथ ही रोटेशन प्रणाली लागू करने की मांग की है। यह मांग इसलिए भी की जा रही है क्योंकि सरकार ने पुरानी व्यवस्था पर चुनाव कराने की इच्छा व्यक्त की है। 2 दिसंबर को हुई सुनवाई में बेंच ने चार हप्ते के अंदर राज्य से जवाब मांगा है।दिसंबर में पंचायत चुनाव का ऐलान हो सकता

सूत्रों से जानकारी है कि कोर्ट ने नोटिस जारी कर मुख्य सचिव को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। ऐसी चर्चाएं थी कि राज्य निर्वाचन आयोग दिसंबर में पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है, लेकिन अब हाईकोर्ट द्वारा मुख्य सचिव से 4 हफ्तों में जवाब देने का निर्देश दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब पंचायत चुनाव की तारीखों के ऐलान में देरी हो सकती है।

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