मध्य प्रदेश: पंचायत चुनाव रद्द होने पर प्रत्याशी ने दी आत्महत्या की चेतावनी

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मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव निरस्त होने के बाद अब नामांकन पत्र दाखिल करके चुनाव प्रचार शुरू करने वाले लोगों का गुस्सा भी सामने आने लगा है। रतलाम जिले में एक जनपद प्रत्याशी ने सीएम हेल्प लाइन में आत्महत्या की चेतावनी दे डाली है। वहीं, भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है। कांग्रेस ने पंचायत चुनाव को भाजपा का राजनीतिक स्वार्थ करार दिया है तो भाजपा पंचायत चुनाव निरस्त होने पर कांग्रेस को दोषी बता रही है।  

राज्य निर्वाचन आयोग के पंचायत चुनाव निरस्त कर दिए जाने के बाद 24 दिन चली चुनाव प्रक्रिया पर करोड़ों रुपए का खर्च बेकार साबित हुआ है। वहीं, नामांकन प्रक्रिया, नाम वापसी के बाद जो प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, उन्होंने चुनाव प्रचार सामग्री, दीवार लेखन आदि शुरू कर दिया था। अचानक चुनाव निरस्त होने से उऩका हजारों रुपए का खर्च बेकार हो गया है। इससे लोगों की नाराजगी दिखाई दे रही है। हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों को नामांकन फार्म के साथ भरी गई राशि वापस करने के आदेश किए हैं लेकिन प्रचार सामग्री और अन्य खर्चों से प्रत्याशियों की नाराजगी बढ़ी है। गौरतलब है कि एक ग्राम पंचायत में तो 44 लाख रुपए में सरपंची की कुर्सी आपसी समझौते में एक प्रत्याशी ने बोली में खरीद भी ली थी। 

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रतलाम के प्रत्याशी ने दी धमकी


रतलाम जिले के एक जनपद प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह ने सीएम हेल्प लाइन में धमकी दी है। उन्होंने पंचायत चुनाव निरस्त होने से उनके हजारों रुपए खर्च होने की शिकायत दर्ज कराना चाही थी। मगर सीएम हेल्प लाइन से जब उन्हें राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज  कराने का आग्रह किया गया तो वे नाराज हो गए। उन्होंने चुनाव खर्च के बेकार जाने पर आत्महत्या की चेतावनी दी है। 


कांग्रेस नेता सैयद जाफर ने मंत्री भूपेंद्र सिंह पर विधानसभा में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि वे उनके स्तर के नेता नहीं हैं लेकिन इतने बड़े नेता ने विधानसभा में भ्रामक व गलत जानकारी दी कि मेरे और जया ठाकुर द्वारा ओबीसी आरक्षण खत्म करने की मांग अदालत में रखी गई। इस गलत बयानी के लिए उन्हें माफी मांगना चाहिए। वहीं, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. हितेष बाजपेयी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उसकी वजह से ही पंचायत चुनाव निरस्त हुए हैं जिससे पंचायतों में प्रतिनिधित्व करने वाले लाखों लोगों की उम्मीद पर पानी फेर दिया है।

उल्लेखनीय है कि ओबीसी आरक्षित पदों को छोड़कर जिन अन्य सवा तीन लाख पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी रखी थी, वहां पहले और दूसरे चरण के नामांकन पर्चे भरने, नाम वापसी तक की प्र्क्रिया पूरी हो चुकी थी। इन पदों के लिए दो लाख 15035 लोोगों ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पर्चे भरे थे। इनमें से जिला पंचायत सदस्य के लिए 3541, जनपद पंचायत सदस्य के लिए 14 हजार 814, सरपंच पद के लिये 60 हजार 415 और पंच पद के लिये 1 लाख 36 हजार 265 अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन-पत्र प्रस्तुत किया है। हालांकि इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने नाम वापसी भी की थी और करीब सवा लाख से ज्यादा प्रत्याशी चुनाव में बचे थे। इनमें से औसत रूप से प्रत्याशियों ने करीब पांच से दस हजार रुपए चुनाव प्रचार व अन्य खर्चों में कर दिया था।

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