क्रांतिसूर्य जननायक टंट्या भील के लंदन में हैं तीर धनुष

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राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने क्रांतिसूर्य जननायक टंट्या भील के बलिदान दिवस के अवसर पर नेहरू स्टेडियम इंदौर में प्रदर्शित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर गृह मंत्री एवं इंदौर जिले के प्रभारी डॉ. नरोत्तम मिश्र, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, जनजातीय कार्य विभाग मंत्री सुश्री मीना सिंह, वन मंत्री विजय शाह, संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर, सांसद शंकर लालवानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

जबलपुर कारावास का दुर्लभ चित्र

चित्र प्रदर्शनी में टंट्या मामा का वह वास्तविक फोटोग्राफ भी शामिल हैं जब उन्हें गिरफ़्तार करके जबलपुर जेल भेजा गया था। प्रदर्शनी में टंट्या मामा के पैरों में बेड़ियां जकड़े हुए एक फ़ोटो भी शामिल है। उनके पैतृक गाँव गढ़ी कोठड़ा में  किशन जी के निवास स्थान पर स्थित देवस्थान भील परंपरा की जानकारी देता है। टंट्या मामा के पोते और किशन जी के पुत्र नत्थू सिंह का वास्तविक चित्र,  ग्राम कोठड़ा में स्थित पीर की दरगाह और जबलपुर में सन 1874 में बनी सेंट्रल जेल का फ़ोटो भी वहाँ लगाया गया है। यहीं पर 4 दिसंबर 1889 को टंट्या मामा को फाँसी दी गई थी। 

लंदन म्यूज़ियम में सुरक्षित हैं तीर धनुष

इस चित्र प्रदर्शनी में टंट्या मामा और उनके साथियों को जब गिरफ़्तार किया गया तो उनके पास से ज़ब्त तीर धनुष के फोटोग्राफ भी हैं, ये तीर धनुष वर्तमान में लंदन के म्यूज़ियम में सुरक्षित हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स में 10 नवंबर 1889 को एक समाचार प्रकाशित हुआ था, जिसमें अंग्रेज़ पत्रकार द्वारा टंट्या मामा को भारतीय रॉबिन हुड कहा गया था। इसमें उल्लेख है कि अंग्रेजों से लूटे गए धन एवं वस्तुओं का स्वयं उपयोग टंट्या मामा द्वारा कभी भी नहीं किया गया। लूटे हुए धन एवं वस्तुओं को गरीबों में बांट दिया करते थे। समाचार पत्र की फ़ोटो भी यहाँ दर्शाई गई है। इसके अतिरिक्त अन्य बहुत से पोर्टेट यहाँ लगाए गए हैं जो उनके जीवन के विविध पक्षों को प्रदर्शित करते हैं।

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