Saturday, January 28, 2023
Homeधर्मJanmashtami exact date 2022: 18 या 19 अगस्त गृहस्थ और वैष्णव कब...

Janmashtami exact date 2022: 18 या 19 अगस्त गृहस्थ और वैष्णव कब मनाएं जन्माष्टमी? जानें आचार्यों का मत व संपूर्ण पूजन विधि

Krishna Janmashtami 2022 Kab hai: हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। जानें इस साल अगस्त में कब है जन्माष्टमी-

Janmashtami date 2022:Will Janmashtami be celebrated for three days on 18th  19th and 20th August know when is Janmashtami celebrated - Astrology in  Hindi - Janmashtami date 2022:क्या तीन दिन 18, 19
Janmashtami

Krishna Janmashtami 2022 Kab hai in India: जन्माष्टमी के त्योहार को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति है। कुछ पंडित 18 तो कुछ ज्योतिषाचार्य 19 अगस्त को जन्माष्टमी उत्तम बता रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस साल जन्माष्टमी पर दो शुभ योग का संयोग भी बन रहा है। जन्माष्टमी पर ध्रुव व वृद्धि योग बन रहे हैं। जानें गृहस्थ व वैष्णव किस दिन मनाएं जन्माष्टमी-

जन्माष्टमी 2022 की तारीख को लेकर पंडितों का मत-

इस साल गृहस्थ और वैष्णव अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ 19 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे। आचार्य माधवानंद (माधव जी) कहते हैं कि पहले गृहस्थ और साधु-संत अलग-अलग दिन जन्माष्टमी मनाते थे। इस वर्ष ऐसा नही होगा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण पक्ष अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, लेकिन इस बार 19 अगस्त (शुक्रवार) को दो साल बाद जन्माष्टमी कृतिका नक्षत्र में मनाया जाएगा।

पंडित पीके युग कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण की पूजा गृहस्थ सुख-सौभाग्य, पुत्र व वंशवृद्धि के लिए करते हैं। रोहिणी नक्षत्र का संबंध जहां चंद्रमा से होता है, वहीं कृतिका नक्षत्र का संबंध सूर्य से होता है, जो शासन सत्ता से जुड़ा होता है।

वहीं पंडित राकेश झा कहते हैं कि इस जन्माष्टमी पर ध्रुव योग के साथ जयद योग का युग्म संयोग बन रहा है। भक्त धन-धान्य व वंश वृद्धि के लिए लड्डू गोपाल को पीत पुष्प में इत्र लगाएं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी दूर करने के लिए गोपाल को गुड़ से निर्मित खीर व हलवा का भोग लगाना चाहिए।

जन्माष्टमी पूजा- विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
घर के मंदिर में साफ- सफाई करें।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
सभी देवी- देवताओं का जलाभिषेक करें।
इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है।
लड्डू गोपाल का जलाभिषेक करें।
इस दिन लड्डू गोपाल को झूले में बैठाएं।
लड्डू गोपाल को झूला झूलाएं।
अपनी इच्छानुसार लड्डू गोपाल को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
लड्डू गोपाल की सेवा पुत्र की तरह करें।
इस दिन रात्रि पूजा का महत्व होता है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण का जन्म रात में हुआ था।
रात्रि में भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा- अर्चना करें।
लड्डू गोपाल को मिश्री, मेवा का भोग भी लगाएं।

लड्डू गोपाल की आरती करें।
इस दिन अधिक से अधिक लड्डू गोपाल का ध्यान रखें।
इस दिन लड्डू गोपाल की अधिक से अधिक सेवा करें।

Mahindra Scorpio: नई Scorpio Classic की बाजार में जबरदस्त धूम, देखें खूबसूरत फोटो

लाल सिंह चड्ढा की ठग्स ऑफ हिंदोस्तान से भी बुरी हालत, क्या चीन में चमकेगी किस्मत?

Mangal Rashi 2022 :– मंगल का मेष राशि से वृष में हुआ प्रवेश, इन राशियों के लिए पूरी जानकारी

Aaj Ka Panchang: पंचाग के अनुसार जानिए किस मुहूर्त में करें गणपति की आराधना, जिससे मिले मनचाहा फल

निचे दिए गये बटन को दबाकर शेयर करें
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments