स्वामी का सपा में शामिल होना और भाजपा में मची भगदड़ का इशारा किस ओर? क्या यूपी में भाजपा कमजोर पड़ रही?

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 दूसरी पार्टियों से नेता भाजपा में शामिल होते थे, लेकिन क्या ये बदली हवाएं उत्तर प्रदेश में बीजेपी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाएंगी? 

भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ चुके  स्वामी प्रसाद मौर्य शुक्रवार को समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार हो गए। उनके साथ आठ और बागी विधायक भी सपा में शामिल हुए। इन नेताओं ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ली।

योगी कैबिनेट में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य और धर्म सिंह सैनी के साथ भगवती सागर, विनय शाक्य, रोशनलाल वर्मा, मुकेश वर्मा, बृजेश कुमार प्रजापति, चौधरी अमरसिंह सपा में शामिल हुए। योगी कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले दारा सिंह चौहान 16 जनवरी को सपा की सदस्यता ले सकते हैं। भाजपा छोड़ने वाले सभी नेताओं के इस्तीफे एक ही जैसे लिखे गए हैं। सभी मंत्रियों और विधायकों ने भाजपा पर दलितों और पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप लगाया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि दो तरह के नेता भाजपा छोड़ रहे हैं, एक जिन्हें लगता है कि पार्टी हारने वाली है और दूसरे जिन्हें लगता है उन्हें टिकट से वंचित कर दिया जाएगा। औसतन भाजपा सत्ता विरोधी लहर को दूर करने के लिए 25 से 35 प्रतिशत विधायकों को टिकट देने से इनकार करती है। पार्टी इस बार भी कुछ ऐसा ही करने का मन बना चुकी है। हाल ही में मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन को लेकर किए गए एक सर्वेक्षण में 42 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि उनके मन में विधायकों के खिलाफ गुस्सा है।

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