Monday, January 30, 2023
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Cashew:काजू की खेती से होगी अच्छी उपज और मुनाफा, जानिए कैसे करे काजू की खेती

Cashew:- कम महेनत में लाखो की कमाई जानिए कैसे ? काजू एक प्रकार का पेड़ होता है, जिसके फल सूख जाने के बाद मेवे के रूप में उत्पादन देते है | काजू सूखे मेवे के लिए बहुत ही लोकप्रिय माना जाता है। काजू का इस्तेमाल खाने में किया जाता है, इसके साथ ही इसे कई तरह की मिठाइयों को बनाने तथा उनमे सजावट के लिए भी किया जाता है।

Cashew: इसमें काजू कतली की मिठाई को बनाने के लिए काजू को पीसकर उपयोग में लाया जाता है। इसके अतिरिक्त काजू का इस्तेमाल मदिरा को बनाने में भी किया जाता है। इसलिए काजू की फसल को व्यापारिक तौर पर बड़े पैमाने पर उगाया जाता है तथा यह निर्यात का भी एक बड़ा व्यापार है।

Cashew: काजू की व्यावसायिक खेती दिनों-दिन लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि काजू सभी अहम कार्यक्रमों या उत्सवों में अल्पाहार या नाश्ता का जरूरी हिस्सा बन गया है। देश में ही नहीं, विदेशी बाजारों में भी काजू की बहुत अच्छी मांग है। काजू का उपभोग कई तरह से किया जाता है। काजू का प्रयोग अनेक प्रकार की मिठाइयों में किया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग मदिरा बनाने में भी किया जाता है। काजू के छिलके का इस्तेमाल पेंट से लेकर स्नेहक (लुब्रिकेंट्स) तक में होता है।

Cashew: काजू का पेड़ तेजी से बढऩे वाला उष्णकटिबंधीय पेड़ है जो काजू और काजू का बीज पैदा करता है। काजू की उत्पत्ति ब्राजील से हुई है। किंतु आजकल इसकी खेती दुनिया के अधिकांश देशों में की जाती है। सामान्य तौर पर काजू का पेड़ 13 से 14 मीटर तक बढ़ता है। हालांकि काजू की बौनी कल्टीवर प्रजाति जो 6 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है, जल्दी तैयार होने और ज्यादा उपज देने की वजह से बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है।

Cashew:काजू की खेती से होगी अच्छी उपज और मुनाफा, जानिए कैसे करे काजू की खेती

Cashew:काजू के पौधारोपण के तीन साल बाद फूल आने लगते हैं और उसके दो महीने के भीतर पककर तैयार हो जाता है। बगीचे का बेहतर प्रबंधन और ज्यादा पैदावार देनेवाले प्रकार (कल्टीवर्स) का चयन व्यावसायिक उत्पादकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

Cashew

Cashew: काजू की कई उन्नत और हाइब्रिड या वर्णसंकर किस्मे उपलब्ध हैं । अपने क्षेत्र के स्थानीय कृषि, बागबानी या वन विभाग से काजू की उपयुक्त किस्मों का चुनाव करें । विभिन्न राज्यों के लिए काजू की उन्नत किस्मों की संस्तुति राष्ट्रीय काजू अनुसंधान केंद्र (पुत्तूर) द्वारा की गई है। इसके अनुसार वैसे तो झारखंड राज्य के लिए किस्मों की संस्तुति नहीं है परन्तु जो किस्में उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, बंगाल एवं कर्नाटक के लिए उपयुक्त है उनकी खेती झारखंड राज्य में भी की जा सकती है। क्षेत्र के लिए काजू की प्रमुख किस्में वेगुरला-4, उल्लाल-2, उल्लाल-4, बी.पी.पी.-1, बी.पी.पी.-2, टी.-40 आदि है।

Kaju Vengurla – 1
M Vengurla – 2
Vengurla-3
Vengurla-4
Vengurla-5
Vriddhachalam-1
Vriddhachalam-2
Chintamani-1
NRCC-1
NRCC-2
ulal-1
ulal-2
ulal-3
Ulal-4
UN-50
Vriddhachalam-3
vii(cw)hone
BPP-1
Akshay(H-7-6)
Amrita(H-1597)
Angha (H-8-1)
Anakkayam-1 (BLA-139)
Dhana (H 1608)
Dharashree(H-3-17)
BPP-2
BPP-3
BPPP-4
BPPP-5
BPPP-6
BPPP-8(H2/16)

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