हृदय मंदिर के अंदर संतोष: चित्त को स्थिर करना जरूरी, मन को मिलेगी शांति

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जब कभी किसी दु:खद घटना से तुम्हारा मन खिन्न हो, निराशा के बादल चारों ओर छाए हुए हों, किसी कारण से चित्त दुःखी हो, भविष्य की भयानक वह आशंका सामने खड़ी हुई हो, बुद्धि किंकर्त्तव्यविमूढ़ हो रही हो, तो इधर- उधर मत भटको। उस लोमड़ी को देखो, शिकारी कुत्तों से घिरने पर भाग कर अपनी गुफा में घुस जाती है और वहां संतोष की सांस लेती है।बाहर की दुनिया को भूलें

ऐसे विषम अवसरों पर सब ओर से अपने चित्त को हटा लो और अपने हृदय-मंदिर में चले जाओ। बाहर की समस्त बातों को बिलकुल भूल जाओ। पाप-तापों को द्वार पर छोड़कर जब भीतर जाने लगोगे तो मालूम पड़ेगा कि एक बड़ा भारी बोझ, जिसके भार से गर्दन टूटी जा रही थी, उतर गया और तुम बहुत ही हल्के रुई के टुकड़े की तरह हलके हो गए हो। हृदय-मंदिर में इतनी शांति मिलेगी, जितनी ग्रीष्म से तपे हुए व्यक्ति को बर्फ से भरे हुए कमरे में मिलती है। कुछ ही देर में आनंद की झपकियां लेने लगोगे।ब्रह्मलोक या गोलोक

हृदय के इस सात्विक स्थान को ब्रह्मलोक या गोलोक भी कहते हैं क्योंकि इसमें पवित्रता, प्रकाश और शांति का निवास होता है। परमात्मा ने हमें स्वर्ग-सोपान सुख प्राप्त करने के लिए दिया है, किंतु अज्ञानतावश मनुष्य उसे जान नहीं पाता।

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